The Aryavarth Express के हाथ लगे दस्तावेजों में बैंक रिकॉर्ड और सार्वजनिक घोषणा में बड़ा अंतर, 2015 के भव्य कार्यक्रम पर संदेह
बेंगलुरु: करीब एक दशक पहले आयोजित एक चैरिटी कार्यक्रम अब सवालों के घेरे में आ गया है। कर्नाटक मारवाड़ी समाज द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में घोषित की गई 31 लाख रुपये की दान राशि और समाज के बैंक रिकॉर्ड के बीच भारी अंतर सामने आया है। The Aryavarth Express के हाथ लगे दस्तावेज इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
कर्नाटक मारवाड़ी समाज का पंजीकरण सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत वर्ष 2010-11 में (Registration No. SOR/BLU/DR/552/10-11) हुआ था। संस्था पिछले कई वर्षों से बेंगलुरु में सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करती रही है और इन्हें अक्सर समाजसेवा से जोड़कर प्रस्तुत किया जाता रहा है। लेकिन The Aryavarth Express द्वारा प्राप्त दस्तावेजों और सूत्रों से मिली जानकारी से कम से कम एक बड़े कार्यक्रम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
विवाद के केंद्र में 7 मार्च 2015 को पैलेस ग्राउंड्स के प्रिंसेस ग्रीन हॉल में आयोजित “हास्य कवि सम्मेलन” है। यह कार्यक्रम मारवाड़ी संघ दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया था और इसे एक चैरिटी इवेंट के रूप में प्रचारित किया गया था। कार्यक्रम का उद्देश्य पद्मनाभनगर स्थित महाराजा अग्रसेन अस्पताल को डायलिसिस मशीन के लिए धन देना बताया गया था।
सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम बेहद भव्य था। आयोजन में बड़े स्तर पर सजावट, मेहमानों की मेजबानी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का इंतजाम किया गया था। कार्यक्रम पर करीब 45 से 50 लाख रुपये तक खर्च होने का अनुमान लगाया गया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने मंच से घोषणा की कि डायलिसिस मशीन के लिए 31 लाख रुपये का चेक (नंबर 112131) अस्पताल को दिया गया है। बताया जाता है कि इस चेक पर उस समय के समाज के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल के हस्ताक्षर थे।
लेकिन जब समाज के 2014-15 के बैंक रिकॉर्ड की जांच की गई तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आई।
The Aryavarth Express के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार उस पूरे वित्तीय वर्ष में समाज के बैंक खाते में कुल मिलाकर करीब 17 लाख रुपये के ही लेन-देन दर्ज हैं, जो कि कार्यक्रम में घोषित 31 लाख रुपये की दान राशि से भी काफी कम है।
नियमों के मुताबिक किसी भी पंजीकृत सोसाइटी द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में प्राप्त होने वाली धनराशि और खर्च का पूरा विवरण बैंक खाते और ऑडिट रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए। लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों में इस कार्यक्रम से जुड़ी बड़ी रकम का कोई स्पष्ट हिसाब नजर नहीं आता।
सूत्रों का दावा है कि इस कार्यक्रम के लिए समाज के कई व्यवसायियों और दानदाताओं से 1.25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई गई थी, जिसमें से बड़ी रकम नकद में प्राप्त होने की बात कही जा रही है। लेकिन यह रकम समाज के आधिकारिक बैंक रिकॉर्ड में दिखाई नहीं देती।
मामला उस समय और उलझ गया जब 31 लाख रुपये के चेक को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे। अस्पताल से जुड़े कुछ लोगों ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान उन्हें चेक सौंपा गया था, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह चेक बैंकिंग प्रक्रिया में क्लियर नहीं हुआ।
जब इस पूरे मामले पर The Aryavarth Express ने उस समय के अध्यक्ष आनंद अग्रवाल से संपर्क किया तो उन्होंने इस वित्तीय गड़बड़ी पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उनका कहना था कि उन्हें इस लेन-देन की पूरी जानकारी नहीं है।
वहीं कर्नाटक मारवाड़ी समाज के मौजूदा पदाधिकारियों से भी इस मामले में जवाब मांगा गया, लेकिन बैंक रिकॉर्ड और घोषित दान राशि के बीच अंतर को लेकर कोई स्पष्ट स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
इस कार्यक्रम के समन्वयक बताए जा रहे दिनेश क्रेजरीवाल की भूमिका को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस मामले में उनकी ओर से अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पारदर्शिता पर सवाल
The Aryavarth Express के पास मौजूद दस्तावेज यह बड़ा सवाल खड़ा करते हैं कि जब समाज के पूरे साल के बैंक लेन-देन करीब 17 लाख रुपये थे, तो फिर एक कार्यक्रम में 31 लाख रुपये का चेक कैसे जारी किया गया। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं है कि कार्यक्रम के लिए जुटाई गई कथित करोड़ों की राशि का हिसाब आधिकारिक रिकॉर्ड में क्यों नहीं दिखाई देता।
वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि किसी भी पंजीकृत सोसाइटी के लिए दान और खर्च का पूरा पारदर्शी रिकॉर्ड रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है, खासकर तब जब कार्यक्रम सार्वजनिक चंदे से आयोजित किया गया हो।
जांच की मांग
समाज के कुछ सदस्यों और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इन विसंगतियों को देखते हुए इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
उनका कहना है कि अगर कार्यक्रम के लिए वास्तव में बड़ी मात्रा में दान जुटाया गया था, तो उसका स्रोत, भुगतान का तरीका और धन का अंतिम उपयोग पूरी तरह सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
जब तक इन सवालों के जवाब सामने नहीं आते, तब तक 2015 के पैलेस ग्राउंड्स कार्यक्रम और कर्नाटक मारवाड़ी समाज की वित्तीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल बने रहेंगे।