बेंगलुरु: गार्डन सिटी से गार्बेज सिटी बनी राजधानी — BBMP और कांग्रेस सरकार पर फूटा जनता का गुस्सा

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बेंगलुरु: एक समय में “गार्डन सिटी” के नाम से मशहूर बेंगलुरु अब “गार्बेज सिटी” कहलाने लगा है। शहर भर में फैले कचरे और बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा है। लोगों ने ब्रुहत बेंगलुरु महानगर पालिका (BBMP) और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर लापरवाही और कुप्रबंधन का आरोप लगाया है।

कोरमंगला, इंदिरानगर, व्हाइटफील्ड और येलहंका जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सड़कों पर कूड़े के ढेर साफ देखे जा सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर दिन बढ़ती गंदगी से न सिर्फ जीवन मुश्किल हो गया है, बल्कि मच्छरों और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

“BBMP अपनी सबसे बुनियादी जिम्मेदारी भी नहीं निभा पा रहा है। जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, बदबू से जीना मुश्किल हो गया है,” — रेखा मूर्ति, निवासी, जयनगर।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं की गई तो डेंगू, चिकनगुनिया और श्वसन रोगों का खतरा और बढ़ सकता है।

BBMP ने इस हालात के लिए ठेकेदारों से विवाद और कर्मचारियों की कमी को कारण बताया है, लेकिन जनता इसे सिर्फ बहाना मान रही है।

“सरकार को विज्ञापनों और विदेश यात्राओं के लिए फंड है, लेकिन सफाई के लिए नहीं? शर्मनाक!” — एक ट्विटर यूजर ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और BBMP को टैग करते हुए लिखा।

कांग्रेस सरकार, जिसने स्वच्छ प्रशासन और बेहतर बुनियादी ढांचे का वादा किया था, अब अपनी ही नीतियों में नाकाम साबित हो रही है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा है और इसे “प्रशासनिक विफलता” बताया है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी चिंता जताई है और कहा है कि यह सिर्फ स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि बेंगलुरु की अंतरराष्ट्रीय पहचान पर भी सवाल है।

हालांकि BBMP ने सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए नई टेंडर प्रक्रिया और निगरानी की बात कही है, लेकिन नागरिक अब सिर्फ वादों से संतुष्ट नहीं हैं — उन्हें चाहिए ठोस कार्रवाई, और वह भी तुरंत।

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