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बेंगलुरु: श्री सालासर बालाजी सेवा समिति द्वारा 11 जनवरी को आयोजित नाटक ‘चक्रव्यूह’ को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन कार्यक्रम से जुड़े आर्थिक लेन-देन और लिए गए बड़े फैसलों को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। समिति के कुछ पदाधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने बिना ट्रस्ट की बैठक बुलाए और बिना कमेटी से प्रस्ताव पारित कराए, अपने स्तर पर कई प्रायोजकों को ‘लाइफ मेंबरशिप’ देने का निर्णय ले लिया।
सूत्रों के अनुसार, नाटक के दौरान जिन प्रायोजकों से सहयोग लिया गया था, उन्हें बाद में लाइफ मेंबर बना दिया गया, जबकि यह प्रस्ताव न तो कमेटी की बैठक में रखा गया और न ही इसे विधिवत पारित किया गया। इस फैसले से ट्रस्टियों और लाइफ मेंबर्स में गहरा असंतोष है। कई सदस्यों का कहना है कि लाइफ मेंबर बनाना अपने आप में एक बड़ा और दीर्घकालिक निर्णय है, जिसे बिना बैठक और चर्चा के लेना नियमों के विरुद्ध है।
लाइफ मेंबर्स का आरोप है कि मौजूदा पदाधिकारी स्वयं को संस्था का ‘मालिक’ समझकर निर्णय ले रहे हैं। उनका कहना है कि यह संस्था एक सार्वजनिक और सामाजिक संगठन है, लेकिन इसे कुछ लोग निजी लिमिटेड कंपनी की तरह चला रहे हैं, जहां पांच पदाधिकारी पांच निदेशकों की तरह काम कर रहे हैं।
विश्वसनीय सूत्रों और कुछ ट्रस्टियों व लाइफ मेंबर्स के बयानों के अनुसार, मौजूदा पदाधिकारियों की कार्यशैली को लेकर व्यापक असंतोष व्याप्त है। न केवल निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि अब तक नाटक ‘चक्रव्यूह’ का पूरा लेखा-जोखा भी सार्वजनिक नहीं किया गया है। कार्यक्रम से संस्था को कितना लाभ हुआ या किसी प्रकार का नुकसान हुआ—इस संबंध में अब तक न तो ट्रस्टियों को और न ही लाइफ मेंबर्स को कोई आधिकारिक जानकारी दी गई है।
सदस्यों का कहना है कि किसी भी बड़े कार्यक्रम के बाद आय-व्यय का विवरण सामने लाना अनिवार्य होता है, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जानकारी को छिपाया जा रहा है। इससे संदेह और गहराता जा रहा है कि आखिर ऐसा कौन सा कारण है जिसके चलते हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं किया जा रहा।
प्राप्त जानकारी और कुछ सदस्यों के आरोपों के अनुसार, समिति में बड़े वित्तीय घोटाले की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी को लेकर मांग उठ रही है कि सरकार को तत्काल श्री सालासर बालाजी सेवा समिति के सभी खातों की जांच करानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और संस्था की पारदर्शिता बहाल हो सके।