72% तक नक्शे से विचलन का आरोप
बेंगलुरु: शहर के बसवनगुडी स्थित करियप्पा रोड पर बनी विवादित ‘फतेह बिल्डिंग’ पर अब गिराए जाने का खतरा मंडरा रहा है। भवन के खिलाफ दाखिल याचिका पर कर्नाटक हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और मामला आदेश के चरण में है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि भवन निर्माण में स्वीकृत नक्शे से लगभग 72 प्रतिशत तक विचलन किया गया है और बेसमेंट का निर्माण बिना अनुमति के किया गया।
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कई वर्ष पहले बीबीएमपी (बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका) ने नोटिस जारी कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की थी। यहां तक कि ध्वस्तीकरण का आदेश भी पारित किया गया था, लेकिन अमल में देरी होती रही। शिकायतकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचा गया, जिसके बाद उन्हें हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने कथित तौर पर स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण के मामलों में स्थानीय प्राधिकरण कानून के तहत कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं और उन्हें अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। शहर में अवैध इमारतों के बढ़ते मामलों पर हाईकोर्ट पहले भी सख्त रुख अपना चुका है।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अब सबकी निगाहें अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत ध्वस्तीकरण का निर्देश देती है तो यह शहर में अवैध निर्माण के खिलाफ एक और सख्त संदेश होगा।
वर्षों से चल रहा विवाद
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि भवन मालिक दिनेश बोरा ने शहर में अन्य स्थानों पर भी नियमों के विपरीत निर्माण किए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बसवनगुडी की फतेह बिल्डिंग के मामले में कहा जा रहा है कि पूर्व में निचली अदालत से स्थगन आदेश लेकर कार्रवाई को रोका गया था। बाद में उच्च न्यायालय में दोबारा याचिका दायर होने के बाद मामला फिर सक्रिय हुआ।
बैंक शाखा भी भवन में संचालित
विवाद को और जटिल बनाता है इस भवन में संचालित एक निजी बैंक की शाखा। भवन में आईसीआईसीआई बैंक की शाखा चल रही है। बैंक अधिकारियों ने लंबित न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन कहा कि वे अदालत के आदेश का पालन करेंगे। यदि भवन पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है, तो शाखा को स्थानांतरित करना पड़ सकता है, जिससे ग्राहकों और बैंक संचालन पर असर पड़ सकता है।
शहर में अवैध निर्माण बड़ी चुनौती
बेंगलुरु में अवैध निर्माण लंबे समय से एक गंभीर समस्या बना हुआ है। शहरी विशेषज्ञों का कहना है कि नियमों की अनदेखी और कार्रवाई में देरी के कारण ऐसे मामले बढ़ते रहे हैं। अब यह देखना होगा कि हाईकोर्ट का फैसला इस दिशा में किस तरह का संदेश देता है और बीबीएमपी उसे कितनी तत्परता से लागू करता है।
फिलहाल फतेह बिल्डिंग खड़ी है, लेकिन अदालत के अंतिम आदेश के बाद उसकी किस्मत तय होगी।