त्रिपुरा सरकार शराब से बढ़ती आय से खुश, लेकिन आईएमएफएल दुकान मालिक नाखुश

अगरतला (परिवर्तन): त्रिपुरा में शराब की बिक्री से राजस्व सृजन पिछले कुछ वर्षों में 12 प्रतिशत की स्थिर दर से बढ़ रहा है, जिससे सरकार खुश है। हालांकि, व्यवसाय से जुड़े लोग उतने खुश नहीं हैं।

भारत में निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) का कारोबार करने वाले व्यापारियों का दावा है कि राजस्व में वृद्धि वास्तव में लाइसेंस शुल्क में भारी वृद्धि के कारण है और यह लगभग 42 लाख की आबादी वाले राज्य में शराब की बिक्री में वृद्धि को नहीं दर्शाता है।

राज्य आबकारी संगठन के उपायुक्त केशव सिन्हा ने कहा कि 2017-2018 के दौरान आबकारी शुल्क संग्रह 186.96 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-2025 में 484.09 करोड़ रुपये हो गया है।

सिन्हा ने बताया, ‘‘कोविड-19 महामारी के दौरान के 2019 से 2020 के समय को छोड़ दें तो राज्य में पिछले आठ वर्षों से राजस्व संग्रह में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 2019-2020 के दौरान केवल 231.70 करोड़ रुपये आबकारी शुल्क के रूप में एकत्र किए गए थे।’’

अधिकारी ने कहा कि आबकारी शुल्क के संग्रह में वृद्धि से पता चलता है कि शराब की खपत बढ़ रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी उपायों को लागू करके अधिक से अधिक राजस्व एकत्र करने के लिए हर संभव कदम उठा रहे हैं।’’

आबकारी विभाग द्वारा तैयार किए गए आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन वर्षों के दौरान राजस्व संग्रह में काफी वृद्धि हुई है।

सरकार ने 2022-2023 में आबकारी शुल्क के रूप में 368.11 करोड़ रुपये, 2023-2024 में 417 करोड़ रुपये और 2024 -2025 में 484.09 करोड़ रुपये अर्जित किए।

आबकारी विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में 2023-2024 की तुलना में राजस्व संग्रह में शुद्ध वृद्धि 16.09 प्रतिशत रही।

हालांकि, पूर्वोत्तर राज्य में शराब की दुकान के मालिक इस खुशी में साझेदार नहीं बन सके क्योंकि उनका दावा है कि राजस्व संग्रह में वृद्धि दुकानों के लिए उच्च लाइसेंस शुल्क के कारण हुई है न कि शराब की खपत में वृद्धि के कारण।

अगरतला में एक विदेशी शराब की दुकान के मालिक अमल चंद्र लोध ने कहा, ‘‘राजस्व संग्रह त्रिपुरा में शराब की वास्तविक खपत को नहीं दर्शाता है क्योंकि सरकार ने लाइसेंस शुल्क में अत्यधिक वृद्धि की है।’’

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