क्या मैसूर बन रहा है कर्नाटक की ‘ड्रग्स राजधानी’? दो साल की पड़ताल में सामने आए चौंकाने वाले दावे

पर्यटन की पहचान पर नशे का काला साया! क्या संगठित ड्रग्स नेटवर्क ने शाही शहर में जमा लिए हैं पैर?

समाचार परिवर्तन | विशेष खोजी रिपोर्ट

कर्नाटक का गौरव, शाही विरासत का प्रतीक और लाखों पर्यटकों की पहली पसंद मैसूर अब एक बेहद गंभीर सवाल के केंद्र में है। मंदिरों, महलों, योग, शिक्षा और स्वच्छता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध इस शहर पर अब कथित तौर पर संगठित ड्रग्स नेटवर्क के सक्रिय होने के आरोप लग रहे हैं।

समाचार परिवर्तन की लगभग दो वर्ष तक चली खोजी पड़ताल में ऐसे दावे सामने आए हैं कि शहर में कथित रूप से एक ऐसा नेटवर्क काम कर रहा है, जो पर्यटकों और ग्राहकों की मांग के अनुसार नशीले पदार्थ उपलब्ध कराने की व्यवस्था करता है। यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि कर्नाटक की पर्यटन छवि पर भी बड़ा सवाल होगा।

तीन परतों में फैला होने का दावा: निवेशक, एजेंट और फाइनेंसर

जांच में दावा किया गया है कि यह कथित नेटवर्क तीन स्तरों पर संचालित होता है—निवेशक, स्थानीय एजेंट और फाइनेंसर

कथित निवेशक की भूमिका

रिपोर्ट के अनुसार, नवीन कुमार गुप्ता का नाम कथित रूप से उस व्यक्ति के रूप में सामने आया है, जो वित्तीय व्यवस्था, जोखिम प्रबंधन और कथित नेटवर्क के संचालन में अहम भूमिका निभाता है। जांच में यह भी दावा किया गया है कि गोवा-मैसूर कॉरिडोर का उपयोग कथित सप्लाई रूट के रूप में किया जाता है।

स्थानीय एजेंटों का कथित नेटवर्क

जांच में शोभित केडिया का नाम एक कथित स्थानीय एजेंट के रूप में सामने आने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने कथित तौर पर यह संकेत दिया कि मैसूर से बेंगलुरु और ऊटी तक भी नशीले पदार्थों की सप्लाई की जाती है। उन्होंने कथित निवेशक को एक बड़े कारोबारी के रूप में वर्णित किया।

फाइनेंस की कथित व्यवस्था

रिपोर्ट में शीतल दरदा का नाम कथित फाइनेंसर के रूप में लिया गया है। जांच के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर नकद, बैंक ट्रांसफर अथवा अन्य माध्यमों से वित्तीय सहायता देने की बात कही, बशर्ते किसी विश्वसनीय व्यक्ति की गारंटी हो।

अब बड़ा सवाल—क्या एजेंसियां करेंगी कार्रवाई?

आर्यावर्त एक्सप्रेस का दावा है कि उसके पास कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों की संपर्क जानकारी और अन्य विवरण मौजूद हैं। यदि जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत सामग्री सही पाई जाती है, तो यह मामला केवल ड्रग्स तस्करी का नहीं बल्कि संगठित अपराध से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है।

अब निगाहें कर्नाटक पुलिस, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और अन्य जांच एजेंसियों पर हैं कि वे इन दावों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाएं और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करें।

अब कथित तौर पर ‘होम डिलीवरी’ तक पहुंचा नेटवर्क

जांच के दौरान आर्यावर्त एक्सप्रेस को ऐसे भी दावे मिले हैं कि कथित नेटवर्क अब केवल तय स्थानों पर ही नहीं, बल्कि मैसूर शहर के विभिन्न इलाकों में होम डिलीवरी के माध्यम से भी नशीले पदार्थ उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहक की मांग और लोकेशन के आधार पर कथित एजेंट डिलीवरी की व्यवस्था करते हैं। यदि ये दावे जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह संकेत होगा कि अवैध कारोबार पहले की तुलना में अधिक संगठित और व्यापक रूप ले चुका है।

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