श्री सालासर बालाजी सेवा समिति के वार्षिक आम बैठक में अहंकार और अराजकता की पराकाष्ठा — अध्यक्ष और सचिव के गैर-जिम्मेदार रवैये से ट्रस्ट की साख खतरे मे

समाचार परिवर्तन

बेंगलुरु: दिनांक 12 अक्टूबर को आयोजित ट्रस्ट मीटिंग में जो घटनाएँ घटीं, वे केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं, बल्कि ट्रस्ट की मर्यादा, गरिमा और विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार हैं।

यह मीटिंग किसी संस्था की नहीं, बल्कि कुछ व्यक्तियों के अहंकार और शक्ति प्रदर्शन का मंच बन गई।
शुरुआत में ही जब ट्रस्ट के सचिव मनित सोमानी ने यह घोषणा की कि लाइफ मेंबर को न तो बोलने का अधिकार है और न ही वोट करने का, तभी यह स्पष्ट हो गया कि उद्देश्य चर्चा नहीं, बल्कि चुप कराने और दबाने की राजनीति है। सभी लाइफ मेंबरों ने इस अलोकतांत्रिक निर्णय का कड़ा और एकजुट विरोध किया।
वोट का अधिकार न होना एक बात है, परंतु अपनी आवाज़ उठाने का अधिकार छीन लेना लोकतंत्र के मुँह पर तमाचा है।
“हमने इस ट्रस्ट में केवल धन नहीं दिया — हमने विश्वास और पहचान दी है। क्या अब हमें अपने ही मंच पर बोलने का अधिकार भी नहीं”?

लंबे विरोध के बाद जब बोलने का अधिकार दिया गया, तब तक स्पष्ट हो गया था कि ट्रस्ट के भीतर लोकतंत्र दम तोड़ चुका है।
इसके बाद जो हुआ, वह ट्रस्ट के इतिहास का सबसे काला और शर्मनाक अध्याय बन गया।

ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रमोद मुरारका द्वारा अग्रवाल समाज के अध्यक्ष का सार्वजनिक अपमान करना असभ्यता, अहंकार और सत्ता के नशे का जीवंत उदाहरण है।
जब एक अध्यक्ष यह कहे कि “हम आपको अध्यक्ष नहीं मानते,” तो यह केवल व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं, बल्कि संस्था के सिद्धांतों और संविधान की हत्या है।

क्या अब ट्रस्ट कुछ लोगों की मनमानी और व्यक्तिगत राजशाही से चलेगा?

क्या ट्रस्ट डीड के नाम पर अब कुछ लोग खुद को मालिक और बाकी सदस्यों को प्रजा समझते हैं?
अगर हाँ — तो यह साफ़ है कि अब ट्रस्ट डीड में संशोधन की आवश्यकता अपरिहार्य हो गई है।
यह संस्था किसी की निजी जागीर नहीं, बल्कि उन सभी का सामूहिक योगदान है जिन्होंने इसे खड़ा किया।
अध्यक्ष प्रमोद मुरारका और सचिव मनित सोमानी  का बिना कारण बताए मीटिंग से उठकर चले जाना।

यह कदम न केवल गैर-जिम्मेदाराना और कायरता का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाता है कि सवालों से बचना अब इन पदाधिकारियों की आदत बन गई है।
जो सदस्य ट्रस्ट के लिए धन, समय और समर्पण देते हैं, क्या उन्हें सवाल पूछने का भी अधिकार नहीं?
ऐसी मानसिकता तानाशाही, भ्रष्टाचार और अहंकार का मिश्रण है — जो किसी संस्था को भीतर से खोखला कर देती है।
कल की मीटिंग ने यह सिद्ध कर दिया कि वर्तमान नेतृत्व ने संवेदनशीलता, अनुशासन और शालीनता जैसी सभी सीमाएँ लांघ दी हैं।
अध्यक्ष प्रमोद मुरारका  और सचिव मनित सोमानी  का आचरण उस पद की गरिमा पर कलंक है जिसे वे संभाले हुए हैं।

समस्त ट्रस्टी ओर लाइफ मेंबरों की मांग:

👉 तत्काल इस समिति को रद्द करें और एक नई समिति बनाएँ।

👉 तत्काल एक पूर्ण वार्षिक आम बैठक बुलाई जाए जिसमें सभी ट्रस्टी और लाइफ मेंबर उपस्थित हों।
👉 और उस बैठक में सभी मुद्दों पर स्पष्ट, लिखित, तथ्यपूर्ण और प्रमाणित उत्तर प्रस्तुत किए जाएँ।

आगे की जाँच जारी है और जल्द ही अपडेट किया जाएगा।

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